एकादशी कब है? 6 अक्टूबर 2026 को इंदिरा एकादशी, जानें पारण और व्रत कथा
एकादशी कब है? मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026 को इंदिरा एकादशी है। यह आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी है और पितृ पक्ष में पड़ती है। व्रत रखने वाले श्रद्धालु बुधवार, 7 अक्टूबर को द्वादशी के दिन पारण करेंगे। दिल्ली के लिए पारण का समय सुबह 6:17 से 8:38 बजे तक है। दूसरे शहरों में सूर्योदय और पारण का समय अलग हो सकता है, इसलिए अपने स्थान का पंचांग देखना उपयोगी होगा।
इंदिरा एकादशी की तिथि और पारण
दिल्ली के समय के अनुसार एकादशी तिथि 6 अक्टूबर को तड़के लगभग 2:07 बजे शुरू होती है और 7 अक्टूबर को रात 12:34 बजे समाप्त होती है। यहां ‘7 अक्टूबर को रात 12:34 बजे’ का अर्थ 6 अक्टूबर की रात बीतने के तुरंत बाद का समय है। व्रत की तारीख 6 अक्टूबर है; तिथि समाप्त होते ही आधी रात को पारण नहीं किया जाता। पारण अगले दिन, द्वादशी पर निर्धारित समय में होता है।
भारत से बाहर रहने वालों को भारतीय समय सीधे अपने स्थानीय समय में बदलकर व्रत या पारण तय नहीं करना चाहिए। उदाहरण के लिए, वॉशिंगटन डीसी में भी इंदिरा एकादशी का व्रत 6 अक्टूबर को है, लेकिन वहां 7 अक्टूबर को स्थानीय पारण समय सुबह 7:10 से 9:28 बजे तक है। स्थान बदलने पर तिथि के आरंभ और समाप्ति का घड़ी वाला समय भी बदलता है।
इंदिरा एकादशी व्रत कथा
प्रचलित व्रत कथा में महिष्मती नगरी के राजा इंद्रसेन का उल्लेख मिलता है। कथा के अनुसार, एक दिन देवर्षि नारद उनके दरबार में पहुंचे। स्वागत के बाद नारद ने राजा को बताया कि उन्होंने यमलोक में उनके पिता को देखा है। पिता ने अपने बेटे तक यह संदेश पहुंचाने को कहा था कि वह इंदिरा एकादशी का व्रत करे और उसका पुण्य उनके निमित्त अर्पित करे।
यह सुनकर इंद्रसेन दुखी हुए और उन्होंने नारद से व्रत की विधि पूछी। नारद ने उन्हें दशमी से संयम रखने, पितरों का स्मरण करने और एकादशी पर भगवान विष्णु की आराधना करने का निर्देश दिया। राजा ने अपने परिवार के साथ व्रत किया। कथा में आगे कहा गया है कि व्रत के फल से उनके पिता को यमलोक से मुक्ति मिली। यह धार्मिक आख्यान है; इसमें वर्णित फल श्रद्धा और परंपरा का विषय है।
इसी कथा के कारण इंदिरा एकादशी पर भगवान विष्णु की पूजा के साथ पूर्वजों को याद करने का विशेष स्थान है। कोई श्रद्धालु कथा पढ़ता है, कोई परिवार के साथ सुनता है, तो कोई पितरों के निमित्त प्रार्थना और दान करता है। परिवार या संप्रदाय की परंपरा के अनुसार पूजा-विधान में अंतर हो सकता है।
व्रत कैसे रखें?
कथा में दशमी के दिन स्नान, पितरों के निमित्त श्रद्धापूर्वक कर्म और एक समय भोजन का वर्णन है। एकादशी की सुबह स्नान के बाद व्रत का संकल्प लेकर विष्णु पूजा की जाती है। श्रद्धालु अपनी परंपरा के अनुसार दीप, पुष्प और भोग अर्पित कर सकते हैं तथा इंदिरा एकादशी की कथा पढ़ या सुन सकते हैं। द्वादशी की सुबह पूजा के बाद निर्धारित समय में भोजन या जल लेकर व्रत खोला जाता है।
सभी लोग एक ही तरह का उपवास नहीं रखते। कुछ लोग केवल जल लेते हैं, जबकि कुछ फलाहार या दूध लेते हैं। आम एकादशी परंपरा में व्रत के भोजन से अनाज और दालें अलग रखी जाती हैं, लेकिन आहार के नियम घर और संप्रदाय के अनुसार बदल सकते हैं। अपनी क्षमता के अनुरूप व्रत का संकल्प लेना बेहतर है; बिना भोजन या पानी के रहने को अनिवार्य न समझें।
यदि सवाल अक्टूबर की अगली एकादशी के बारे में है, तो इंदिरा एकादशी के बाद पापांकुशा एकादशी गुरुवार, 22 अक्टूबर 2026 को आएगी। दोनों अलग व्रत हैं: 6 अक्टूबर की इंदिरा एकादशी कृष्ण पक्ष में है, जबकि 22 अक्टूबर की पापांकुशा एकादशी शुक्ल पक्ष में होगी।

